प्राकृतिक संसाधन

वन

जिले की कसडोल तहसील वनाच्छादित है। जिसमें जिले का 875.27 हेक्टेअर वन क्षेत्र है। जहां वनस्पतियों एवं पशु-पक्षियों की विभिन्न प्रजातियां बड़ी संख्या में पार्इ जाती है। कसडोल तहसील के अंतर्गत ही बारनवापारा अभ्यारण सिथत है, जहां पर्यटन विभाग द्वारा मोटल का निर्माण कराने के अलावा जंगल सफारी की व्यवस्था भी की गर्इ है। इसके अलावा सोनबरसा, खैरवारडीह (बलौदा बाजार), धमनी, धाराशिव (पलारी), कचलोन (सिमगा), सुमा (भाटापारा) के सुरक्षित वन है।

खनिज एवं उधोग

बलौदा बाजार जिले में चुना-पत्थर ही प्रमुख खनिज है। सिमगा तथा बलौदा बाजार तहसील में यह खनिज पाया जाता है। इसके कारण यहां सिमेन्ट संयंत्रों की बहुतायत है, जिनमें ग्राम हिरमी व रावन में अल्ट्राटेक, ग्राम रवान में अम्बुजा, ग्राम सोनाडीह में लाफार्ज जैसे अन्तराष्ट्रीय संयंत्र स्थापित है। इसके अलावा ग्राम रिसदा में इमामी तथा भूरूवाडीह में श्री सिमेन्ट संयंत्र प्रस्तावित है। कसडोल तहसील सिथत सोनाखान के बघमरा गांव में स्वर्ण चूर्ण पाये जाने की पुषिट भी हुर्इ है, किंतु उत्पादन लागत अधिक होने के चलते इस दिशा में आपेक्षित प्रगति नहीं हुर्इ। बिलार्इगढ़, कसडोल तहसील तथा सिमगा में बुनकरों द्वारा हथकरघा से साडि़यों व अन्य वस्त्रों का निर्माण भी किया जाता है। बलौदा बाजार, भाटापारा में अनेक रार्इस मिल, दाल मिल, पोहा मिल संचालित है। यहां का चावल विदेशों में भी निर्यात किया जाता है साथ ही पावर प्लांट, पीतल कारखाना व अन्य लघु व मध्यम उधोग भी संचालित है। जिला निर्माण पश्चात औधोगिक पार्क की स्थापना से नए उधोग की संभावना बलवती हुर्इ है।

कृषि व सिंचार्इ

बलौदा बाजार जिले की छ: तहसीलों के अंतर्गत कृषि का कुल रकबा 269888 हेक्टेअर है। जिले में धान की फसल प्रमुखता से बार्इ जाती है। जिले के 970 गांव की 10 लाख से ज्यादा आबादी में से अधिकांशत: लोग कृषि पर ही आश्रित है। समर्थन मूल्य पर 86 सहकारी समितियों के माध्यम से धान क्रय किया जाता है। जिले में 4 कृषि उपज मंडिया भी है, जिनमें भाटापारा सिथत मंडी वर्ष भर फसल क्रय विक्रय के लिए प्रसिद्ध है। सिंचार्इ हेतु जिले में अनेक नदी, नाले सिथत है, जिनमें महानदी, शिवनाथ, जोंक प्रमुख नदियां है। सहायक नदियों में बालमदेयी है वहीं जमुनिया व खोरसी नाला भी प्रमुख है। बि्रटिश काल में सिंचार्इ सुविधा को विकसीत करने हेतु 1935-36 में लगभग 200 कि.मी. नहरों का जाल बिछाया गया। बलौदा बाजार शाखा नहर व लवन शाखा नहर के माध्यम से गंगरेल बांध का पानी आज भी खेतों मेें पहुंचाया जाता है। शासन द्वारा औसत वर्षा में कमी के चलते बलौदा बाजार को वृषिटछाया क्षेत्र घोषित किया गया है। केवल पलारी तहसील ही सिंचीत क्षेत्र है शेष तहसीलों में सिंचीत क्षेत्र का रकबा कम है। कसडोल क्षेत्र में विशालकाय बलारडेम के अलावा जल संसाधन विभाग द्वारा नदियाें में एनिकेट व कुछ अन्य छोटे बांध भी निर्मित कराये गये है। भाटापारा नहर का निर्माणकार्य विगत कर्इ वर्षो सें जारी है, जिसके पूर्ण होने से जिले का भाटापारा तहसील भी सिंचार्इ सुविधा से परिपूर्ण हो जावेगा।